शायद मैं उसे कभी बता नही पौँगा

शायद मैं उसे कभी बता नही पौँगा

मुझे आज भी याद है वो कॉलेज के बाद डॅन्स प्रॅक्टीस का टाइम जब हम डॅन्स प्रॅक्टीस करने हमेशा मिलते थे. बहोट ही फन लविंग और झल्ली लड़की थी वो. मैं तो उसका जैसे दीवाना ही था. डोर खड़े रहके

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वो पहली बार जब हम मिले

क्या काहु मैं इसके बारे में. मेरे लिए तो यह भगवान ही है,क्यूंकी इसके थ्रू मैं अपनी जान से मिल सका और आज हम दोनो एक साथ भोथ खुश है. चलो अब आप लोग भी सोच रहे होंगे की आख़िर

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कुछ बातें रह जाती अनकही

कुछ बातें रह जाती अनकही बात है ह्मारे कॉलेज टाइम की, जब मैं फर्स्ट एअर में था. मुझे शुरू से ही प्यार में कोई खाश दिलचस्पी नही थी. मैं भोथ ही फन लविंग और खुद में ही खुश रहने वाला

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तेरे मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम

तेरे मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम फ्रेंड्स आज मैं आप सभी के साथ अपने ज़िंदगी के सबसे यादगार पल ब्ताने जा रहा हू. म शुवर की मेरी त्राह आपने भी अपनी लाइफ में कभी किसी ना किसी से

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कुछ बातें रह जाती अनकही

कुछ बातें रह जाती अनकही बात है ह्मारे कॉलेज टाइम की, जब मैं फर्स्ट एअर में था. मुझे शुरू से ही प्यार में कोई खाश दिलचस्पी नही थी. मैं भोथ ही फन लविंग और खुद में ही खुश रहने वाला

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क्या दिल के एहसास का प्यार होना ज़रूरी है ?

क्या दिल के एहसास का प्यार होना ज़रूरी है यह ज़रूरी तो नही की हर रिस्ते का कुछ नाम हो. कभी कभी तन्हा रहकर भी कोई अपने होने का एहसास दिलवा ही देता है. खुशी जब मिलने ही वाली हो

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काश ज़िंदगी इस तरह बदली ना होती

काश ज़िंदगी इस तरह बदली ना होती मुझे तुम्हारी ज़रूरत है. प्लीज़ मुझसे डोर मत जाओ. यह वो कुछ लाब्ज़ है जो उसने मुझसे लास्ट टाइम फेस तो फेस कहे थे. प्यार बहुत था. यह हमरी लास्ट मीटिंग थी. हम

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और बतो ही बतो में प्यार हो गया

और बतो ही बतो में प्यार हो गया घर की फाइनान्षियल कंडीशन की वजह से मुझे पड़ाई छोड़ देनी पड़ी,,हलकी मैं भी पंडा चाहती थी, कुछ बड़ा क्रना चाहती थी अपने मा पापा के लिए पर!! मैं गुजराती फॅमिली से

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मेने प्यार करना नही छोड़ा, सिर्फ़ जताता नही हू अब

मेने प्यार करना नही छोड़ा, सिर्फ़ जताता नही हू अब कहते हैं किसी चीज़ को दिल से चाहो तो वो तुम्हे मिल जाती है. मेरी कहानी की शुरुआत भी कुछ ऐसे ही हुई. मैं लंडन मे पार्ट टाइम जॉब करता

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मुझे अपनी जान से ज़्यादा चाहने वाली ना जाने अब कहा खो गयी

मुझे अपनी जान से ज़्यादा चाहने वाली ना जाने अब कहा खो गयी हेलो मेरा नाम शाहिद ह ओर मैं मुरादाबाद का रहने वाला हू. ये स्टोरी 2009 की है. हमारा कपड़ो का कारोबार था. मैं एक खुशमिजाज लड़का था.

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