मेरी सच्ची प्रेम कहानी

मेरी सच्ची प्रेम कहानी

मई सुनेहा मैं पहले भी बता चुकी आपने प्यार के बड़े मैं की पंकज मुझ से कितना प्यार करते है. मैं कभी भी उनके प्यार को समाज नही पाई पंकज मेरी ज़िंदगी है पंकज ज़िंदगी के हर बुरे मोड़ पर मेरे साथ होता है चाहे कोई हो जा ना हो. अब अन के गहर वल्लो को ये यकीन है की पंकज मुझे नही बुलाता पर पंकज मुझे कभी नही भूल पता ये घर वल्लो के शक दूर करने के लिए वो मुझ से बहुत कूम मिलते है. अब पंकज मेरे लिए घर वल्लो को भुला कर मुझ से दूर रह कर खाना की परवाह ना कर के दिन रात काम करते है ता जो वो आपने ज़िंदगी मैं तराकी कर सके ता जो वो मेरे लिए आपने पेरेंट्स चोद कर मुझ से षड्दी कर सके.

अब वो मुझ से बहुत कूम मिलता है काम ज़्यादा करते है पैसे जमा करते है मेरी हर खुशी प्यूरी करते है. वो मुझे चोद कर कहीं नही जाता. मैं उसका सहारा कभी नही बन पाई जब पंकज निराश होता मैं कभी उन के पास नही होती वो बीमार होता है मैं उनको कभी दवा ना खिला पाई घर वल्लो की वजह से हमेशा एक दूसरे से दूर ही होते है. तकलीफ़ बहोत होती है मुझे पर मैं क्या करो मजबूरी है. मैं पंकज से इतना प्यार कराती हो घर वल्लो की वजह से कभी हास कर बात नही कर पट्टी यही दार लग्गा रहते है काकी कोई देख ना ला. मेरा पाप ड्रिंक बहुत करते है भाई कोई काम नही करते है घर हमारा है नही ममाई एक्षपारे हो चुके है भुआ के पास्स रहते हमेशा दनम्णत पड़ती है भुआ की इतने बुरे हालाटो के बावजूद भी पंकज ने मुझे आपनाया मैं बहुत ग़रीब लड़की हो पंकज एक आक्ची फॅमिली से बेलोग करते है इसलिए उनके घर वल्लो कभी नही मानने ग! ए वो रिक ह फॅमिली का एक्लोटा बेटा है पंकज ना भी काम ना करे तो उसके पिता उसे ज़िंदगी भर खिले सकते है उसने मेरे लिए आपनी पड़ाई चोद दी +2 के बाद काम करना शुरो कर दिओया सिर्फ़ मेरे लिया ता जो मेरे लिए खुशी पैदे कर सके मिझे ज़िंदगी भर खुश रख सके. मुझे बहुत दुख होता है की मेरे लिए पंकज को इतने दुख उतने पड़ड़ रहे है मैं पंकज को कितनी बार कह चुकी हो की मुझे चोद दे पर मानने की त्यआर ही नही होता ये सब सोच मेरे दिल बहुत दुखी होता समाज नही की मैं क्या करो घर वल्लो की इजात का सोचो जिःनो ने कभी मेरे बड़े मैं सोचा ही नही ये पंकज बड़े सोचो जो मुझे इतना प्यार करते है. समाज नही क्या कारिओ प्लीज़ हेल्प इन माई लव स्टोरी सुनेहा

लोवे स्टोरी – लाइफ का एक सच

लोवे स्टोरी – कविता दस

डियर फ्रेंड्स,मई आपको आपनी एक कहानी बतने जा रही हू या उ कहे क आपनी लाइफ का एक सच बतने जा रही हू , आप लोग प्लीज़ इसे दिल से पड़ना ओर प्लीज़ मुज़ेः जल्दी से रिप्लाइ देना क मैं आयेज क्या करू……….

मेरा नाम कविता दस ह, मेरी एज 25 साल ह ,आज से 2 साल पहले मैं एक पवत्. कंपनी मैं जॉब कराती थी. मुझे कुछ दिन ही हुए थे वाहा कम करते हुए , तभी एक लड़के [कारण] की एंट्री हुए मतलब उनकी व जॉब मेरे साथ थी, पहली नज़र मैं ही मैं उनको लीके करने लगी थी, बुत वो बहुत कम बात करते थे, उनको कम से बाहर जाना पराता था, तो मैं हमेशा फोन कराती थी, उनका हलचल लेती थी, फिर हमारे एस एम एस का लें-दें भी होने लगा ,,,,,

कुछ दिन बाद मैने उन्हे इनडाइरेक्ट्ली आपने प्यार का इज़हार काइया, तो वो डाइरेक्ट मुझसे बात काइया,,,,,,,,,,, इसी तरह सब बहुत अकचे से चलने लगा , हम एक दूसरे को बहुत प्यार करते ह , बुत कभी कभी उनको मेरा प्यार समझ नही आता, तो कभी मुझे उनका प्यार समझ नही आता ह, हम बहुत झगरा करते थे ओर ग़लती चाहे किसी की व तो मानती मैं ही हू…….

अब प्राब्लम ये है क हम कभी सदी नही कर सकते है, तो मैं उनको भूलना चाहती हू , बुत बहुत ट्राइ कराती हू उनको भूलने की मगेर नही भूल पा रही हू,,,,,,,,,,

तो फ्रेंड्स प्लिएसए हेल्प मे,,,,,,,,, गिव मे सम सजेशन की मैं उनको कैसे भूलु…

ऐसा भी होता है

नमस्ते दोस्तो,मई दुष्यंत ,जैसा मेरे साथ हुआ ,आपने सोचा भी ना होगा. बात मेरे बचपन की है मैं आपने नानी के घर रहता था .मेरी नानी के पड़ोस मे एक लड़की रहती थी हम दोनो बचपन से साथ रहते थे.यह सब तब तक चला जब मैं 8साल का हो गया हमारी दोस्ती समय के साथ बदती गई सोनी कब मुघसे प्यार करने लगी मुझे टा नही च्ला.मई पड़ने के लिए आपने गम चला आया ,वह आपने पापा के साथ मुंबई चली गई .8 साल बाद मैं आपने नानी के घर गया वाहा शिव रात्रि पर रामायण का पाठ होता है बहुत से लोग आते है.वाहा सोनी भी आई थी ,वह बचपन की तरह मेरे पास दौड़ कर आई, पर मैं बड़ा होने के कारण शर्मा रहा था,उसने कहा तुंटो अकदम बदल हाए हो,मई ने कहा नही अब हम बड़े हो गये है बच्चो की तरह साथ नही रह सकते दुनिया बुरा मानेगी ,सोनी सीरीयस हो गई दयनी बुरा माने तुम तो नही मनोगे ना.माने कहा क्या बोल रही है तेरी उमर सदी के लायक हो गई है बच्चो की सी बात मत करो.सोनी सदी की उमर हो गई है तभी तो ऐसा कह रही हू. मुझे गुस्सा आ गया बोला तू मुंबई जाकर खराब हो गई है.सोनी बोली तुम बदल गए हो और रोटी हुई भाग गई मैं सब कुच्छ जानते हुए भी कुच्छ समझ नही पा रहा था ,गम मे गया दोस्तो से बात की और सो गया.दिन भर घूमने के कारण मैं तक गया था और 9′ बजे ही सो गया लोग देर रात तक जागते रहे थे.रार मुझे लगा कोई मेरे पैर की फिंगर को च्छू रहा है तभी कुच्छ पानी की बूँद जैसा मेरे पैर पर गिरा मेरी आँख खुल गई मैने देखा सोनी रोटी हुई मेरे पैर के पास बैठी थी मैं चुंक गया मैने चारो तरफ देखा ! कोई देख तो नही रहा है .सब गहरी नींद मे सो रहे थे नही तो बेकार मे बाद नमिहोटी .मई उसे पकड़ कर कोने मे ले गया .बोला ए का पागलपन है …पार्ट ब

पहले हिस्से कू बची बाते मैं आपको इस दूसरे भाग मे बताता हू. उस रात किसी तरह समझहहा कर मैं सोनी को उसके घर भर्ज्ना चाहता था .वह एक ही ज़िद पर आदि थी तुम मेरे मन की बात समझते क्यों नही हो.मैने कहा मैं बच्चा नही हू मुझे सब समझ मे आता है.पर मेरी मुम्मी ने हमारी जिंदगी सवारने के लिए बहुत दुख उठाए है हमे कुच्छ बन कर उनके सपनो को बनाना होगा.सोनी पर हमारे सपने ,मई ने कहा उसके लिए सारी जिंदगी पड़ी है.वह गुस्सा होकर बोली तब तुम्हारी मुम्मी से ही बात करेगे……और चली गई .मैने ज़्ब कोच्च बोल तो दिया पर मैं भी उसे बहुत च्चता था पर मुझे मालूम था अभी हमारी एज सॅडी के लायक नही है.आ सब सोचते हुए कब सुबह हो गई मुझे टा भी नही चला.मई शांति से मिलकर उसे आ ज़्ब समझना चाहता था पर उसके आसू देखकर मैं कुछ कह नही पता था.सोनी के पापा को सब मालूम था सुबह ही वो मम्मी से मिलने आ गये.उन्होने सोनी की बात मम्मी से बताई .मम्मी चौक गई बोली आप मुझे आपनी बहन कहते है तो आपकी बेटी को मैं क्या काहोगी.सोनी के पापा अकदम चुप हो गये और चले गये मुझे भी बुरा लगा पर माने जाकर मम्मी को समझाया मुंम्मी बोली ऐसी बात है तो मैं सोनी के पापा से बात करूँगी तुम जाओ मेहमानो को देखो.हम आपने कम मे लग गये तभी गम मे हल्ला मच गया सोनी घर से भाग गई.सुनते ही मेरा चेहरा कला प़ड़ गया मुम्मी और दीदी ने आकर हमे सम्हला .मई आज एक गुनहगार बन चुका था दुष्यंत सिंग

दोस्ती तोड़ना आसान नही होता

दोस्ती तोड़ना आसान नही होता
हमारे फ़्रेंड जो हमसे जुड़े रहते है नेट के ज़रिए तो डियर यहा कम्त मे कुछ फ़्रेंड एक डुआरे से नाराज़ हो जा रहे है ऐसा क्यो हो रहा है डियर एक बात सुनो… सोहिल ग पारी ग और मेरी स्टोरी का मसाला बनाने वाली निक्की ग और आदित्या ग
आप लोग चाट करो पर दिल खुश हो कर गम मे मत रहो यररर लाइफ है आज है कल क्या पता
ग़लत फहमी मे मत रहो आप लोग डियर
अगर एंसन के नाख़ून बढ़ जाते है तो लोग नाख़ून काटते है रिघ्त तो तिल ऐसे ही अगर रिस्ते मे दरार आए तो हमे दरार को हटाना चाहिए रिस्ते को तोड़ कर आप खुश तो रह ही नही सकते ये हम व जानते है
या अगर डियर एसका दरार अगर मैं हू तो आप बता दो आब आप सोचोगे कैसे मैने ये कहा मैं बताता देता हू सुनो ना मैं स्टोरी पोस्ट करूँगा आयार ना आप चाट करोगे आयार ना होगा ज़गड़ा आयार ना होगी दरार रिघ्त डियर
तो आपको बठाना पड़ेगा क्या आप हमसे दूउर जाकर रह पाएँगे एस तो कम्त पोस्ट पर दो और मैं वादा कराता हू कोई स्टोरी विजय राज के नाम से पोस्ट नही होगी
एक दोस्त होने के नाते हम एट्ना कर सकते है ग
या फहीर हमरे प्यारी फ़्रेंड पारी. और सोहिल और आदित्या और आलिया आप लोग ज़गड़ा मत करो नाराज़गी दूर रखो तो फहीर वालेकम बॅक करू मैं आपने नेक्स्ट स्टोरी का एंतजार है हमे आपका जवाब का
आयार हा ज़गड़ा करना है तो निक्की से करो आप भी सोचोगे किस लड़की से आपका सामना हुवा है हहेहेहेः
ओक डियर बे उम्मेड कराता हू आप समझे होन्गे
दोस्ती तोड़ना आसान नही होता