ऐसा भी होता है

नमस्ते दोस्तो,मई दुष्यंत ,जैसा मेरे साथ हुआ ,आपने सोचा भी ना होगा. बात मेरे बचपन की है मैं आपने नानी के घर रहता था .मेरी नानी के पड़ोस मे एक लड़की रहती थी हम दोनो बचपन से साथ रहते थे.यह सब तब तक चला जब मैं 8साल का हो गया हमारी दोस्ती समय के साथ बदती गई सोनी कब मुघसे प्यार करने लगी मुझे टा नही च्ला.मई पड़ने के लिए आपने गम चला आया ,वह आपने पापा के साथ मुंबई चली गई .8 साल बाद मैं आपने नानी के घर गया वाहा शिव रात्रि पर रामायण का पाठ होता है बहुत से लोग आते है.वाहा सोनी भी आई थी ,वह बचपन की तरह मेरे पास दौड़ कर आई, पर मैं बड़ा होने के कारण शर्मा रहा था,उसने कहा तुंटो अकदम बदल हाए हो,मई ने कहा नही अब हम बड़े हो गये है बच्चो की तरह साथ नही रह सकते दुनिया बुरा मानेगी ,सोनी सीरीयस हो गई दयनी बुरा माने तुम तो नही मनोगे ना.माने कहा क्या बोल रही है तेरी उमर सदी के लायक हो गई है बच्चो की सी बात मत करो.सोनी सदी की उमर हो गई है तभी तो ऐसा कह रही हू. मुझे गुस्सा आ गया बोला तू मुंबई जाकर खराब हो गई है.सोनी बोली तुम बदल गए हो और रोटी हुई भाग गई मैं सब कुच्छ जानते हुए भी कुच्छ समझ नही पा रहा था ,गम मे गया दोस्तो से बात की और सो गया.दिन भर घूमने के कारण मैं तक गया था और 9′ बजे ही सो गया लोग देर रात तक जागते रहे थे.रार मुझे लगा कोई मेरे पैर की फिंगर को च्छू रहा है तभी कुच्छ पानी की बूँद जैसा मेरे पैर पर गिरा मेरी आँख खुल गई मैने देखा सोनी रोटी हुई मेरे पैर के पास बैठी थी मैं चुंक गया मैने चारो तरफ देखा ! कोई देख तो नही रहा है .सब गहरी नींद मे सो रहे थे नही तो बेकार मे बाद नमिहोटी .मई उसे पकड़ कर कोने मे ले गया .बोला ए का पागलपन है …पार्ट ब

पहले हिस्से कू बची बाते मैं आपको इस दूसरे भाग मे बताता हू. उस रात किसी तरह समझहहा कर मैं सोनी को उसके घर भर्ज्ना चाहता था .वह एक ही ज़िद पर आदि थी तुम मेरे मन की बात समझते क्यों नही हो.मैने कहा मैं बच्चा नही हू मुझे सब समझ मे आता है.पर मेरी मुम्मी ने हमारी जिंदगी सवारने के लिए बहुत दुख उठाए है हमे कुच्छ बन कर उनके सपनो को बनाना होगा.सोनी पर हमारे सपने ,मई ने कहा उसके लिए सारी जिंदगी पड़ी है.वह गुस्सा होकर बोली तब तुम्हारी मुम्मी से ही बात करेगे……और चली गई .मैने ज़्ब कोच्च बोल तो दिया पर मैं भी उसे बहुत च्चता था पर मुझे मालूम था अभी हमारी एज सॅडी के लायक नही है.आ सब सोचते हुए कब सुबह हो गई मुझे टा भी नही चला.मई शांति से मिलकर उसे आ ज़्ब समझना चाहता था पर उसके आसू देखकर मैं कुछ कह नही पता था.सोनी के पापा को सब मालूम था सुबह ही वो मम्मी से मिलने आ गये.उन्होने सोनी की बात मम्मी से बताई .मम्मी चौक गई बोली आप मुझे आपनी बहन कहते है तो आपकी बेटी को मैं क्या काहोगी.सोनी के पापा अकदम चुप हो गये और चले गये मुझे भी बुरा लगा पर माने जाकर मम्मी को समझाया मुंम्मी बोली ऐसी बात है तो मैं सोनी के पापा से बात करूँगी तुम जाओ मेहमानो को देखो.हम आपने कम मे लग गये तभी गम मे हल्ला मच गया सोनी घर से भाग गई.सुनते ही मेरा चेहरा कला प़ड़ गया मुम्मी और दीदी ने आकर हमे सम्हला .मई आज एक गुनहगार बन चुका था दुष्यंत सिंग

शायद मैं उसे कभी बता नही पौँगा

मुझे आज भी याद है वो कॉलेज के बाद डॅन्स प्रॅक्टीस का टाइम जब हम डॅन्स प्रॅक्टीस करने हमेशा मिलते थे. बहुत ही फन लविंग और झल्ली लड़की थी वो. मैं तो उसका जैसे दीवाना ही था. दूर खड़े रहके उसे देखता रहता था. एक ही ग्रूप में रहके भी कभी बात करने की हिम्मत ही नही हुई हलकी मैं भोथ ही बोलने वाला बंदा था.
यारो मैने सुना है अगर हम लड़कियो को बार बार नोटीस करे और उनको चुप चुप के देखे तो उनको थोड़ा सा तो अंदाज़ा हो ही जाता है की कोन तुम्हे लीके कराता है,,, और कोन नही? तो यह झल्ली क्यू नही समझ पा रही थी?
सयद जान भुज के मुझे सटा रहही थी वो या सच में ही उसे कुछ समझ नही आ रहा था. मेरी ज़यादा अछी तो दोस्त नही थी वो पर में तो उसके पीछे पागल ही था,,उसके जैसे सुंदर और प्यारी लड़की मैने पहले कभी नही देखी थी.
मुझे उसके ग्रूप पार्ट्नर से उसका अछा दोस्त बनना था तो बस मेरे कूल आइडियास को उसे करने का टाइम आगया था. आज डॅन्स प्रॅक्टीस करते हुए हमे 4 दिन हो गये थे और 7 दिन बाद ह्मारा कॉंपिटेशन था और फिर उसके बाद नो प्रॅक्टीस, नो मिलना.. :(

आज मैं और वो लकिली पहले फॉच गये थे, मेने उससे बात करनी चाही,,और वो भी मुझसे बात करने लगी. मुझे लगा की सयद वो भी मुझे लीके कराती होगी क्यूकी वो मुझसे भोथ अच्छे से बात कराती थी…मैं हमेशा उसका इंतेज़ार करटा था और फिर ईव में उसे ड्रॉप करने भी जाता था. ज़ीत्नि प्यारी वो दिखतो थी,,उससे ज़्यादा वो अछी बातें कराती थी. एक बचा नही होता वेसए ही क्यूट सी बातें उसकी. उसे मैं ब्ठाना चाहता था आपने दिल की बातें पर अभी नही,,सही टाइम आने पर. अब हमे बातें करते हुए लगभग 7 दिन हो गये थे. वो और मैं काफ़ी अच्छे दोस्त बन गये थे फ़ेसबुक, व्हातसपप और रियल लाइफ में बभही. मुझे काफ़ी बार लगा जेसे वो भी मुझे लीके कराती है पर कुछ कह भी नही सकते ना, क्यूंकी मैं यह लम्हा भोथ ही स्पेशल ब्नाना चाहता था,,उसके लिए भी और आपने लिए भी..मैं भोथ ही ज़यादा खुश था क्यूंकी जिससे मैं कभी बात करने को तरसटा था,,आज वो मेरी सबसे अछी दोस्त बन गयी थी…वो मुझसे सब बात शेयर कराती थी..जो की ह्मारे दोस्ती की गहराई को बताता है..
आज हमरी प्रॅक्टीस का लास्ट दे था और मैने सोच लिया था की मैं कल डॅन्स पर्फॉर्मेन्स के बाद उसे आपनी सारी फीलिंग्स बता दूँगा, चाहे जो भी हो.

जब हम वापिस जाने लगे तो वफ कहने लगी,,नवीन मुझे तुम्हे कुछ बठाना है..गुड न्यूज़ है…
मुझे लगा सयद वो भी :)
मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा,,मैने खुशी से और थोड़ा शरमाते हुए बोला,,ब्ताओ क्या बठाना है?? वो बोली की नही कल डॅन्स प्रॅक्टीस के बाद बताउँगी,,मैने पूछने की भोथ कोसिस करी पर मानो जेसे उसने ना ब्तने की कसम खा ली हो!! अगले दिन ह्मारा कॉंपिटेशन होना था पर सच ब्टौ तो कॉंपिटेशन से ज़यादा मैं आपने प्यार के इज़हार करने के बड़े में सोच रहा था..
मैने सोच लिया था की उसे आपनी फेवोवरिट प्लेस पे लेजा के,,नीस पे बीत के और एक रोज़ और रिंग के साथ प्रपोज़ कृंगा. मेरे चेहरे से वो एक खिलखिलाती हसी मानो जा ही ना रही हो..
बस कल का इंतेज़ार था.कॉंपिटेशन ख़त्म हुआ और हम मिले..हम दोनो पहले ही भोथ खुश थे क्यूंकी हम कॉम्पेटिओं जीत चुके थे. मैं उसे सब कुछ बता देना चाहता था..
वो आई मेरे पास, उसने मुझे हग किया..वो फीलिंग मैं बता नही सकता…लगा मानो वो मेरी हो गयी हो…

मैने उसे बोला,,चलो एक जगह चलते है..उसने बोला रूको कोई आ रहा है..हम इंतेज़ार करने लगे…मैं आपने ही सपनो में गुम और उसको देखे जा रहा था…तभी वहाँ एक लड़का आया,,वो भाग के उसके पास गयी और उसने उसे हग किया…और मेरे पास आई,,नेवीन,,मीट माई फियान्से,,पुनीत..
मैं क्या बोलता उसके बाद,,वो एक खुशी,वो पागलपन, वो सपना, वो एग्ज़ाइट्मेंट सब एक झटके में ख़त्म हो गया..मुझे लगता था वो सिर्फ़ मेरे साथ ही इतना खुश रहती पर…जब मैने उन दोनो को साथ देखा तो उसकी आँखो में जो प्यार मेने कभी खुद के लिए नही देखा था..वो पुनीत के लिए देखा..

कितनी अजीब बात है ना…कभी वो मुझसे दूर होके भी मेरे सबसे पास थी और आज इतने पास होके भी दूर है…

वो पहली बार जब हम मिले

क्या काहु मैं इसके बड़े में. मेरे लिए तो यह भगवान ही है,क्यूंकी इसके थ्रू मैं आपनी जान से मिल सका और आज हम दोनो एक साथ भोथ खुश है. चलो अब आप लोग भी सोच रहे होन्गे की आख़िर कहानी है क्या? है ना?
चलो दोस्तो आज मैं आपको आपने लाइफ के सबसे हसीन रिस्ते के बड़े में बताता हू. बात है तकरीबन 3 साल पहले की, सयद 3 सेप्टेंबर 2011 था वो दिन. मैं हमेशा की त्राह आपने फ़ेसबुक अकाउंट में स्करोल कर रहा था. मैं ऑनलाइन काफ़ी आक्टिव रहता था. मुझे नये दोस्त बनाना काफ़ी अछा लगता था तो मैं सुंदर सुंदर लड़कियो को रिकवेस्ट भेजता था. ऐसी मैं एक दिन स्करोल कर रहा था तो एक प्रोफाइल मेरी आँखो के सामने आई और वो थी..प्रिया डटा. बिना कुछ सोचे मैने उसे रिकवेस्ट भेज दी. वो आपनी प्रोफाइल पिक्चर में इतनी सुंदर लग रही थी मानो कोई आप्सरा.

लेकिन बुरी बात उसने रिकवेस्ट आक्सेप्ट ही नही की तो मैने सोचा, चलो मेसेज की कर देते है..मेने उसे मेसेज काइया,,ही :)
उसका रिप्लाइ आया,,क्या हम एक दूसरे को जानते है??
मेने बोला…नही पर मुझे आप अछी लगी. क्या आप मेरी दोस्त बनोगी??
उसने बोला..पर मैं तो आपको जानती नही हू लेकिन??
मेने बोला..ब्ताओ क्या जानना है..

वो हसी थोड़ा और ऐसी हमरी चाट चलती रही. वो काफ़ी शर्मीली और प्यारी सी थी..एक हफ्ते बाद उसने मेरी रिकवेस्ट आक्सेप्ट करी थी..वो ज़्यादा और किसी से बातें नही कराती थी…पहले वो ज़यादा ऑनलाइन नही रहती थी फेसबूक पे पर मेरी वजह से वो ऑनलाइन रहने लगी. हम दिन रात चाट करते थे. और कहीं ना कहीं मैं उसे चाहने लगा था. सयद वो भी मुझे पसंद करने लगी थी. मेने उसे एक दिन उसका नंबर माँगा. वो बोली क्यू,,हम यहाँ तो बात करते है ना,,तो आपको नंबर क्यू चाहिए. मैने उसे झूट बोला,,की मैं फेसबूक डेलीट कर रहा हू..तो अगर तुम मेरी दोस्त बने रहना चाहती हो तो तुम दे सकती हो नंबर. वरना तुम्हारी मर्ज़ी. वो थोड़ा सोची और फिर उसने मुझे आपना नंबर दे दिया. :)

हाँ दोस्तोआन मुझे पता है मुझे झूट नही बोलना चाहिए था,,पर जिस झूट से किसी का भला हो,,वो झूट झूट नही रहता ना..हाहाहा..बस फिर क्या था…हम दिन रात चत्ट्टिंग..फिर एक दिन मैने उसे रात को कॉल किया..उसने उठाया नही…मेरे कितने बार रिकवेस्ट करने के बाद उठाया उसने फोन. भोथ धीमे धीमे बात कर रही थी वो..तो मैं भी धीमे धीमे बोलने लग गया…हाहहः भोथ ही ख़ुसनूमा सा मोमेंट हो गया था.. फिर एक बारी हमने मिलने का प्लान बनाया…हाँ हाँ हर बार की तरह मैने ही ज़िद्द किया..क्या करू यारो इश्क़ का रोग ही ऐसा है :)

कल हम मिलने वाले थे…मैं बता नही सकता मैं कितना खुश था. मैने सोच लिया था की कल उसे प्रपोज़ भी कृंगा. इतनी खुशी मुझे कभी नही हुई थी…मैं उठा,,रीडी हुआ..और निकला घर से. वो भी निकल गयी थी आपने घर से. हम पार्क में मिले. मैं जल्दी फॉच गया था. हाथो में गुलाबो का गुलदस्ता लिए, आँखो में उसके आने की खुशी, दिल में उसे देखने का एग्ज़ाइट्मेंट, इन सभी फीलिंग्स के साथ मैं उसका इंतेज़ार कररा था बेंच में बेठे हुए.वो पीछे से आई और उसने मेरी आँखे बंद करदी..वो बोली,,ब्ताओ कौन..प्रिया :* :* वो सामने आई,,,मैं बता नही सकता कितनी प्यारी लग रही थी वो,,वाइट रंग के सूट में..वाउ मैं उसे देखता ही रह गया..वो मोमेंट मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन लम्हा था…जब पहली बार हम मिले फिर मेने उसे प्रपोज़ किया. उसने नज़रे झुका के हल्की सी मुस्कान दी…एक वो दिन था और एक आज का दिन है जब हमारे रीलेशन को 3 साल से भी ज़यादा हो चुके है..और हम अगले कुछ महीनो में हम हमेशा के लिए एक दूज़े के हो जाएँगे.

कितना अछा लगता है ना इस एहसास को बताते हुए. मैं बीटीये नही सकता, यह सारी यादें किसी को बताते हुए और याद करते हुए मुझे कितना अछा लगता है. मैं यही दुआ माँगता हू की मेरी त्राह हर चाहने वाला आपने प्यार से कब्भी जुड़ा ना ह्म :)

कुछ बातें रह जाती अनकही

कुछ बातें रह जाती अनकही

बात है ह्मारे कॉलेज टाइम की, जब मैं फर्स्ट एअर में था. मुझे शुरू से ही प्यार में कोई खाश दिलचस्पी नही थी. मैं भोथ ही फन लविंग और खुद में ही खुश रहने वाला बंदा था. दोस्तोआन की यारी और हर वेआकेंड पार्टीस ही मेरे लिए खुशी का मतलब था. मेरे ग्रूप में सारे दोस्त लड़कियो की बातें करते रहते थे. कभी शीना कभी रीना,,उनकी ऐसी हरकते देख के हसी भी आती थी. दोस्तोआन को हर दूसरे दिन प्यार हो जाता था और एक मैं था जिसे इन 20 सालो में प्यार का एहसास एक बार बभही नही हुआ था. मैं ज़्यादा से ज़्यादा टाइम आपने फ्रेंड्स और फॅमिली के साथ बीतता था. अगर बात करो तो प्यार की तो सयद ही इसका कोई ख़ास मतलब था. बात है उस समय की जब मैं आपने भैया की शादी में गया था जहाँ मुझे दिखी वो. वो भाभी के फ्र्न्स में थी. हम दोनो की काफिई बातें हुई. शादी हो जाने तक कभी प्यार भारी लड़ाई, कभी नोक झोक के साथ अछा टाइम स्पेंड हुआ. फिर शादी ख़त्म तो हम सब चले गये. लेकिन पता नही क्यू यह एहसास कुछ अलग था, बार बार उसके बड़े में सोचना, बार बार उसी का ख्याल. उसे अच्छे से ना जानते हुए भी उससे मिलने को तड़पना और एक यह सवाल,,क्या वो भी मेरे बड़े में सोच रही होगी??

मैं सच ब्टौ तो मुझे नही टा प्यार क्या होता है पर उस समय जो मेरे साथ हो रहा था, मैं नही बीटीये सकता था. दोस्तोआन को भी नही बीटीये सकता था,वो सेयेल मज़ाक उसाते..हहा..तो मैने भाभी से बात की..भाभी और मेरी अंदरस्टॅंडिंग अछी थी पेले से ही. भैया और भाभी की भी मेने भोटग बार हेल्प की थी मिलने में शादी से पहले :प
भाभी ने उसे मिलने बुलाया घर, और फिर एक बार वो मेरे सामने थी. मेने उसे कॉफी के लिए पूछा और वो मन गयी थी. मैं नही चाहता था की वो मुझसे दूर जाए. जैसे एक छोटा बचा होता है ना जिसे कोई खुश कराता है तो वो उसी के साथ रहना चाहता है, बस कुछ ऐसी मेरी हालत थी. मैने उसे उस दिन आपने दिल की बातें शेयर की…और उसे प्रपोज़ किया..और बेस्ट पार्ट जो मैं उसके लिए फील करटा था वो भी वोई फील कराती थी.

मेरी ज़िंदगी का पहला प्यार, मेरी जाहनवी. हम दोनो भोथ खुश थे. कहीं ना कहीं दोस्तोआन से दूरी और वो करीब आने लगी..जहाँ दोस्तोआन के साथ वीकेंड स्पेंड करटा था और सुअभ शाम उससे बात, उसके साथ लोंग ड्राइव. ई वाज़ फीलिंग टॉप ऑफ थे वर्ल्ड. ई वाज़ सो हॅपी.
वो भी मेरी भोथ केर कराती थी. मुझे समझती थी, मुझे मेरे करियर पे ध्यान देने को कहती थी और मुझे उसकी यही बात अछी लगती थी. हम भोथ खुश थे एक साथ. मुझे अभी भी याद है केसे हम आपना 1 मंत आनिवर्सयरी भी सेलेब्रेट करते थे..एक दूसरे को गिफ्ट देते थे,लोंग ड्राइव पे जाते थे, एक दूसरो को प्रॉमिस करते थे की कभी साथ नही चोदेंगे एक दूसरे का तो ऐसा क्या हुआ की आज मेरी जान्हवी मेरे साथ नही है??

ऐसा क्या हुआ की वो जिसे मैं खुद से ज़्यादा चाहने लगा था, जिसे मैं आपनी ज़िंदगी मानने लगा था वो आज मुझसे दूर है.क्या उसने मुझसे कभी प्यार किया था?? क्यू चली गयी वो मुझसे दूर?
आज भी उन लम्हो को सोचता हू तो चेहरे पे एक मुस्कान आ जाती है पर वो अंशु भी नही रुक पाते जो उसके जाने की याद में आ जाते है..
सब कहते है प्यार का एहसास मीठा होता है. भोथ खुश नसीब होते है वो लोग जिनका पहला प्यार उन्हे मिल जाता है लेकिन सयद मैं उनमे से नही !!

कुछ बातें रह जाती अनकही

तेरे मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम

तेरे मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम

फ्रेंड्स आज मैं आप सभी के साथ आपने ज़िंदगी के सबसे यादगार पल ब्तने जा रहा हू. म शुवर की मेरी त्राह आपने भी आपनी लाइफ में कभी किसी ना किसी से प्यार ज़रूर किया होगा. किसी से बेन्तेहा प्यार किया होगा तो आज मैं आप सभी के साथ आपनी लोवेस्टोरी शेयर कर रहा हू. ई रियली होप की आप लोग मुझे समझेंगे और कुछ सही सजेस्ट करेंगे मुझे. प्यार का एहसास जितना अछा फिल्मी दुनिया में लगता है उतना ही अछा रियल लाइफ में भी होता है और यह एहसास मुझे दिलाया प्रिया ने. मुझे अभी भी याद है किस त्राह हम पहली बार मिले थे और मैं पहली नज़र में ही उसका दीवाना हो गया था. हाँ मुझे वो पहली ही नज़र में अछी लगने लग गयी थी पर मैने यह जताया नही. आपने भी कुछ उसूल है यार..हाहाहा. वाले जोक्स आ पार्ट. हमरी अक्सर बात हो जाती थी क्यूंकी एक तो हम एक ही कॉलेज में थे उपर से वो मेरे दोस्त की गर्ल फ्रेंड की दोस्त थी तो एक ग्रूप सा बन गया था. हम अक्सर कॅंटीन में मिला करते थे. वो भोथ ही खुश मिज़्ज़ाज़ लड़की थी और यही बात मुझे उसकी भोथ अछी लगती थी. मुझे उसके साथ टाइम स्पेंड करना भोथ अछा लगता था. हम अक्सर घूमने जाते थे हर वीकेंड में पर कभी अकेले नही गये हम घूमने.

एक बार कोयिन्सिडेंटली हम एक माल में मिले. वो आपने फ्रेंड्स लोग के साथ थी तो मैने ज़्यादा बात नही की. अगले दिन रहूल(दोस्त) और उसकी गर्ल फ्रेंड ने एक ट्रिप प्लान किया जिसमे वो दो न हम दो जा रहे थे. वाउ ग्रेट चान्स तो बे वितहेयरऔर मैं किसी यह ओसुम्म ऑपर्चुनिटी नही चोदने वाला था…हहे. ई वाज़ सो एग्ज़ाइटेड और मैने सोच लिया था की इस ट्रिप मैं ई विल डेफनेट्ली प्रपोज़सहेयरवित आउट अन्य फियर ऑफ थे कॉन्सिक्वेन्सस. हम जाईपुर गये थे. वॉवव वॉट आ वंडरफुल सिटी. हम लोग भोथ हणगौट करते थे. एक बार हम लोग एक भोथ अछी लोकेशन में गये थे. काफ़ी बार ऐसा हुआ की हमे अकेले टाइम स्पेंड करने का टाइम मिल रहा था पर मैं हर बार नही बोल पा रहा था. मुझे 60% पक्का पता था की वो मुझे लीके कराती है पर वोई है ना मैं पूरा शुवर नही था. हम लोग उस लोकेशन में गये थे. वो बोले जा रही थी और मैं उसे देखे जा रहा था और देन वो बोली क्या हुआ, कुछ तो बोलो. मैं फिर कुछ नही बोल पाया. सच में प्यार करना जितना आसान है उतना ही मुस्किल आपना प्यार कन्फेस करना है :प

लेकिन आज मैं उसे सब कुछ ब्तने वाला था, वो सब कुछ जो मेरे लिए में उसके लिए था, वो सब जो मैं उसे नही बीटीये पाया था पिछले 3 महीनो से. मैं उसे पागलो की त्राह चाहने लगा था पर वो पगली मेरे प्यार के बड़े में जानती भी नही थी :( सयद वो मेरा इंतेज़ार कररी हो की मैं उसे पहले प्रपोज़ करू..तो च्लो यही सई :) एम्म हम लोग वापिस होटेल आगये..मैने उसे आज मिलने बुलाया था. आज मैं उसे प्रपोज़ करने वाला था :) भोथ खुश था मैं. आपना बेस्ट ड्रेससुप किया, फ्लवर्स और रिंग बाये की. और मैं फ्टाफ़ट चल दिया. मैं फोचा और थोड़ी देर बाद वो भी आई. उसके गालो का ब्लश उसकी पीच कलर के ड्रेस के साथ मॅच कररा था. उस दिन वो किसी प्रिन्सेस से कम नही लग रही थी.
हम बेठे. उसने पूछा बोलो क्या कहना था..मैं भोथ गब्राया हुआ था. लेकिन लकिली उस दिन म्यूज़िक और अच्छे वेदर ने मुझे बूस्ट उप किया. मैं उठा और आपने नीस में बीत के बोला,,”प्रिया,,ई लव यू, ई लव यू,,ई लव यू आलोतत्त्टटतत्त :* :* विल यू टॉलरेट तीस गाइ इन युवर रेस्ट ऑफ युवर लाइफ?? वो मुस्कुराइ और शी अग्रीड!!!
वोआहह तट मोमेंट :* आज हमरी शादी को 5 साल हो चुके है और जब भी हमरी क्यूट डॉटर मुझे कहानी सुनने को कहती है मैं हमेश उसे यही स्टोरी सुनता हू. होप यू गाइस लाइक्ड माई लव स्टोरी. :)

तेरे मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम

कुछ बातें रह जाती अनकही

कुछ बातें रह जाती अनकही

बात है ह्मारे कॉलेज टाइम की, जब मैं फर्स्ट एअर में था. मुझे शुरू से ही प्यार में कोई खाश दिलचस्पी नही थी. मैं भोथ ही फन लविंग और खुद में ही खुश रहने वाला बंदा था. दोस्तोआन की यारी और हर वेआकेंड पार्टीस ही मेरे लिए खुशी का मतलब था. मेरे ग्रूप में सारे दोस्त लड़कियो की बातें करते रहते थे. कभी शीना कभी रीना,,उनकी ऐसी हरकते देख के हसी भी आती थी. दोस्तोआन को हर दूसरे दिन प्यार हो जाता था और एक मैं था जिसे इन 20 सालो में प्यार का एहसास एक बार बभही नही हुआ था. मैं ज़्यादा से ज़्यादा टाइम आपने फ्रेंड्स और फॅमिली के साथ बीतता था. अगर बात करो तो प्यार की तो सयद ही इसका कोई ख़ास मतलब था. बात है उस समय की जब मैं आपने भैया की शादी में गया था जहाँ मुझे दिखी वो. वो भाभी के फ्र्न्स में थी. हम दोनो की काफिई बातें हुई. शादी हो जाने तक कभी प्यार भारी लड़ाई, कभी नोक झोक के साथ अछा टाइम स्पेंड हुआ. फिर शादी ख़त्म तो हम सब चले गये. लेकिन पता नही क्यू यह एहसास कुछ अलग था, बार बार उसके बड़े में सोचना, बार बार उसी का ख्याल. उसे अच्छे से ना जानते हुए भी उससे मिलने को तड़पना और एक यह सवाल,,क्या वो भी मेरे बड़े में सोच रही होगी??

मैं सच ब्टौ तो मुझे नही टा प्यार क्या होता है पर उस समय जो मेरे साथ हो रहा था, मैं नही बीटीये सकता था. दोस्तोआन को भी नही बीटीये सकता था,वो सेयेल मज़ाक उसाते..हहा..तो मैने भाभी से बात की..भाभी और मेरी अंदरस्टॅंडिंग अछी थी पेले से ही. भैया और भाभी की भी मेने भोटग बार हेल्प की थी मिलने में शादी से पहले :प
भाभी ने उसे मिलने बुलाया घर, और फिर एक बार वो मेरे सामने थी. मेने उसे कॉफी के लिए पूछा और वो मन गयी थी. मैं नही चाहता था की वो मुझसे दूर जाए. जैसे एक छोटा बचा होता है ना जिसे कोई खुश कराता है तो वो उसी के साथ रहना चाहता है, बस कुछ ऐसी मेरी हालत थी. मैने उसे उस दिन आपने दिल की बातें शेयर की…और उसे प्रपोज़ किया..और बेस्ट पार्ट जो मैं उसके लिए फील करटा था वो भी वोई फील कराती थी.

मेरी ज़िंदगी का पहला प्यार, मेरी जाहनवी. हम दोनो भोथ खुश थे. कहीं ना कहीं दोस्तोआन से दूरी और वो करीब आने लगी..जहाँ दोस्तोआन के साथ वीकेंड स्पेंड करटा था और सुअभ शाम उससे बात, उसके साथ लोंग ड्राइव. ई वाज़ फीलिंग टॉप ऑफ थे वर्ल्ड. ई वाज़ सो हॅपी.
वो भी मेरी भोथ केर कराती थी. मुझे समझती थी, मुझे मेरे करियर पे ध्यान देने को कहती थी और मुझे उसकी यही बात अछी लगती थी. हम भोथ खुश थे एक साथ. मुझे अभी भी याद है केसे हम आपना 1 मंत आनिवर्सयरी भी सेलेब्रेट करते थे..एक दूसरे को गिफ्ट देते थे,लोंग ड्राइव पे जाते थे, एक दूसरो को प्रॉमिस करते थे की कभी साथ नही चोदेंगे एक दूसरे का तो ऐसा क्या हुआ की आज मेरी जान्हवी मेरे साथ नही है??

ऐसा क्या हुआ की वो जिसे मैं खुद से ज़्यादा चाहने लगा था, जिसे मैं आपनी ज़िंदगी मानने लगा था वो आज मुझसे दूर है.क्या उसने मुझसे कभी प्यार किया था?? क्यू चली गयी वो मुझसे दूर?
आज भी उन लम्हो को सोचता हू तो चेहरे पे एक मुस्कान आ जाती है पर वो अंशु भी नही रुक पाते जो उसके जाने की याद में आ जाते है..
सब कहते है प्यार का एहसास मीठा होता है. भोथ खुश नसीब होते है वो लोग जिनका पहला प्यार उन्हे मिल जाता है लेकिन सयद मैं उनमे से नही !!

कुछ बातें रह जाती अनकही

क्या दिल के एहसास का प्यार होना ज़रूरी है ?

क्या दिल के एहसास का प्यार होना ज़रूरी है

यह ज़रूरी तो नही की हर रिस्ते का कुछ नाम हो. कभी कभी तन्हा रहकर भी कोई आपने होने का एहसास दिलवा ही देता है. खुशी जब मिलने ही वाली हो तो दूर चली जाती है पर मेने उसके एहसास के साथ खुश रहना सिख लिया है. बात उस समय की है जब हम साथ हुआ करते थे एक ऑफीस में, मैं आज भी वहीं हू लेकिन आज उसके बदले उसकी यादिएन मेरे साथ है. उनका नाम आकाँशा था, हम दोनो एक ही ऑफीस में काम करते थे. वो मेरी सीनियर थी. ऑफीस में सारे लोग स्मार्ट थे या फिर यह कहो बनावटी लोग. मैं भोथ कम बात कराता था सब से. सिर्फ़ ही हेलो और आपने काम से काम लेकिन आकाँशा जी से दूर चाहकर भी नही हो पता था. यह फीलिंग पहले से नही थी. पहले मैं उनसे भी बात भी नही कराता था लेकिन उनका काइंड और केरिंग नेचर ने केसे मुझे उनके करीब ला गया. मुझे पता ही नही चला. जेसा मेरा स्वाभाव था गुमसूँ, वेसए हही आकाँशा जिब ही थी या यह कहो आपनी मुस्कुरात के पीछे लखो दर्द छुपाए बेइती हो.

दोस्तोआन के साथ वो खुश रहती थी पर बाकी त्यम काफ़ी गुमशुम. मैं उनके ग्रूप का मेंबर नही था यहाँ तक की मेरा उनके अलावा कोई भी दोस्त नही था. सब मुझे भुंधू और कमज़ोर बुला के छिडआअतए थे और इन सभी बतआन से जड़तर लोग मुझसे दूर रहते थे पर आकाँशा जी ने मुझे कभी ऐसा महसूस नही होने दिया. वो मुझे आपने बाकी दोस्तोआन कीट रह ही ट्रीट कराती थी, यहाँ तक की मेरे साथ त्यम भी स्पेंड कराती थी. लोग ह्मारे बड़े में बातें करने लगे ऑफीस में लेकिन ना मुझे और ना आकाँशा जी को इससे कोई प्राब्लम थी क्यूंकी हम दोनो को टा था की हम सिर्फ़ अच्छे दोस्त है. पर ऐसा क्यट हा जो मुझे उनसे बार बार मिलने को बेकरार करटा था. क्या यह सिर्फ़ दोस्ती थी? मैं कन्फ्यूज़ था भोथ. मैं उन्हे ना कभी बताया और ना कभी आपने इस एहसास को बयाअँ किया. दिन बीतते गये, दोस्ती और गहरी होती गयी. आकाँशा जी जितनी खूबसूरात थी उसे खूबसूरात उनका मॅन था. जो सिर्फ़ दूसरो की भलाई सोचता था. मुझे नही पता था यह प्यार था की क्या लेकिन अगर यह प्यार था तो सयद में उनके खूबसूरात मॅन का प्रेमी बन गया था. उनकी मुस्कुरात, उनकी छोटी चोटती बतआन में खुशिया ढुंडना यह सब मुझे भोथ अछी लगती थी. प्यार का पता नही पर दिल से उनकी इज़्ज़त कराता था. उनकी खुशी मेरे खुशी की वजह बनती जा रही थी. फिर एक दिन जब वो मेरे पास आई और बोली, मेरी शादी टेयै हो गयी है. कुछ दीनो में मैं यह ऑफीस, यह दोस्त, आपना घर परिवार सब चोद केन आए घर चले जौंगी,,,,उनकी आँखोान में एक उदासी और एक घबराहट देखा मेने और मैं, आपने सपनो को भूलने की कोसिस करने लगा. पूरे ऑफीस में उनकी शादी की मिठाइया बाँटी जाने लगी.

खुश नही था मैं पर एक बनावटी मुस्कुरात के साथ जीने लगा. चीज़े बदल रही थी. वो समय जो आकाँशा जी मेरे साथ व्यतीत कराती थी, वो समय अब उनके मंगेतर को मिलने लगा. ब्रेक टाइम पे वो मेरे से ना बात करके फोन में लगी रहती थी. खुश था मैं क्यूंकी वो खुश थी. सिर्फ़ यह कह सकता हू, सआइ डी उनकी खुशी को आपनी खुशी मन चक्का था पर केसे जियर आहा था वो हर एक लम्हा मुझे ही पता है. डिनन बीतते जा रहे थे और उनके मुझसे दूर जाने का समय पास आ रहा था. और वो दिन आ ही गया जब वो डॉली में बीड़ा होके चली गयी. मेरे ही सामने मेरे प्यार का किसी और की ज़िंदगी बनने जा रहा था. कितना हसीन थे वो लम्हे जब उनकी मुस्कुरात का कारण मैं हुआ कराता था. अब वो कहाँ है यह तो नही पता मुझे पर आज भी 3 साल बाद उनकी यादें मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन लम्हे है.

क्या दिल के एहसास का प्यार होना ज़रूरी है

काश ज़िंदगी इस तरह बदली ना होती

काश ज़िंदगी इस तरह बदली ना होती

मुझे तुम्हारी ज़रूरात है. प्लीज़ मुझसे दूर मत जाओ. यह वो कुछ लाब्ज़ है जो उसने मुझसे लास्ट टाइम फेस तो फेस कहे थे. प्यार बहुत था. यह हमरी लास्ट मीटिंग थी. हम आपने रिश्ते की कमीयो के बात करने के लिए मिले थे क्यूंकी ना ही मैं उसे खोना चाहती थी और ना ही वो. सयद हम 3 अवर्स के लिए एक साथ थे. जिसमे से ज़्यादातर टाइम खामोसी में बिठा. काफ़ी बाटीएन हुई और थे लास्ट थिंग हे साइड, कॅन ई हग यू प्लीज़!! तट मोमेंट ई कोउल्ड़न’त गेट थे वर्ड्स तो स्पीक आउट माई फीलिंग और मेने माना कर दिया और फिर हम चले गये. ज़िंदगी केसे बदल जाती है, पता ही नही चलता ना. आज जो तुम्हारा सबसे क्लोज़ है, क्या पता कल वो तुमसे इतने दूर चले जाए की उसके होने का एहसास भी ज़िंदा ना रहे.

अब वो मेरी ज़िंदगी में नही है पर कभी तन्हा होती हू तो वो याद आता है.मैं चाहकर भी नही भूल सकती उसको. कितना अजीब है ना जब वो था तो प्यार का एहसास नही था, आज वो नही है तो सिर्फ़ उसकी याद साथ है. सयद हम दोनो का मिलना मुमकिन ही नही था, सयद ऐसे ही कुछ यादें सिर्फ़ याद आने के लिए बनती है. उसकी लाइफ में कोई और है अब. उसके साथ बिठाया हारे क लम्हा मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन लम्हो में से एक होगा हमेशा.

ई नो मैं कभी नही भूल पौँगी उसको. आज भी 2 साल के बाद, अगर खुशी में कोई याद आता है तो वो. इन आंशुओं का कोई कारण होता है तो सिर्फ़ वो. ज़िंदगी इतनी मायूष कभी नही थी. ऐसा नही है की उसको चाहती हू वपैस लाइफ में. बस काश उसके साथ बिठाए लम्हे दुअबरा जी पाऔ. काश मैं उसे बीटीये पाती, मैने जितना उसे प्यार किया, उतना ही आज भी कराती हू. काश मैं उस वक़्त उसे स्मझ पाती, काश वो मुझसे दूर ना गया होता..काश..ज़िंदगी इस त्राह बॅड्ली ना होती..काश..

काश ज़िंदगी इस तरह बदली ना होती

और बतो ही बतो में प्यार हो गया

और बतो ही बतो में प्यार हो गया

घर की फाइनान्षियल कंडीशन की वजह से मुझे पड़ाई चोद देनी पड़ी,,हलकी मैं भी पंडा चाहती थी, कुछ बड़ा करना चाहती थी आपने मा पापा के लिए पर!! मैं गुजराती फॅमिली से बिलॉंग कराती हू. बात उस समय की है जब नवराती के फेस्टिवल में हम सब फ्रेंड्स दांडिया खेल रहे थे. एक लड़का मुझे बार बार देख रहा था पर जेसे ही मैं उसकी तरफ देखी वो मूह हटा लेता. मुझे थोड़ा अजाईब सा लग रहा था. वो अछा दिख रहा था, मुझे भी वो अछा लगने लगा लेकिन बिना किसी को जाने पहचाने केसे मैं दोस्ती कर स्क्ति थी तो मैने इग्नोर करना ठीक समझा. आगले दिन पता नही क्यू मैने नॉर्मल टाइम से ज़्यादा टाइम लगाया रीडी होने में, टा नही क्यू अछा अछा लग रहा था. सयद दिल में उसे मिलने की इक्चा थी. मेने आपनी फॅवुरेट ड्रेस फनी और गयी लेकिन वो वहाँ नही था. मैने उसे भोथ ढूँढा पर वो नही मिला. मैं साद हो गयी थी. वो नवरात्रि की लास्ट नाइट थी तो अब उसे दुबारा मिलने का ख्वाब ब नही था दिल में.

एक बार में पास में ही मा के साथ सब्जिया लेने गयी थी तो वो मुझे दिखा दुबारा. मॅन में एक ख़्हूषी तो थी लेकिन एक घबराहट भी थी, में सोचा कहीं यह मेरा पीछा तो नही कर रहा है, कहीं यह मा के सामने मुझसे ही बोलने तो नही आएगा?? यह सब थॉट्स माइंड में चल रहे थे लेकिन वो मुझे देख के मुस्कुराया और चला गया.यह बात मेने आपनी बेस्ट फ्रेंड रिचा को ब्टाया. फिर उसने मुझे ब्टाया की वो लड़का यहीं रहता है,,उसकी मम्मी मेरी फ्र्न के कॉलेज में प्रोफेसर है. उसने यह भी ब्टाया की वो लड़का उसी के कॉलेज में पड़ता है और उसका नाम मोहित है. वो रिचा की फ्र्िएंडलीस्ट में था. मैं घर गयी और आपना फ़ेसबुक अकाउंट खोला. हर रोज़ सोने से पहले में उसकी प्रोफाइल देखती थी और हर दिन विश कराती थी की उसकी फ्रेंड रिकवेस्ट आए, उसकी फ्रेंड रिकवेस्ट आए पर नही आई एल

एक दिन मैने ही भेज दी उसे रिकवेस्ट और उसने 2 दिन बाद आक्सेप्ट की मेरी रिकवेस्ट. उसने ही भेजा मुझे,,मैने बभही रिप्लाइ किया..उससे बात करके टा चला की उसके एग्ज़ॅम्स थे इसलिए ऑनलाइन नही आता था. हमरी बात स्टार्ट होने लगी, वो भोथ ही इंट्रेस्टिंग था, भोथ हसटा था. एक दिन मैने उसे बोला,,आप मुझे उस दिन क्यू देख रहे थे?? वो बोला,,तुम लग ही इतने सुंदर रहे थे,,कौन नही देखता??
फिर मेने पूछा,,तो बात क्यू नही करने आए?? वो बोला,,अरे बाबा,,तुम्हारे मुम्मा पापा थे,,मार थोड़ी खानी थी!! मैने बोला,,ओो डराते हो मतलब? वो बोला,, नही रे पगली,,मैं तो आ जाता लेकिन कॉलोनी के लोग थे सब वहाँ,,मैं बात करने आता,,4 लोग देखते. बात करते ह्मारे बड़े में, इससे मेरी इमेज पेट ओह कुछ नही होता लेकिन तुम्हारी इमेज पे उंगलिया ज़रूर उठ जाती. उसका यह रिप्लाइ सुनके मेरा प्यार उसके लिए और बाद गया. मन ही मन मैं उसे पसंद करने लग गयी थी. पर अभी हमे बात किए हुए सिर्फ़ और सिर्फ़ 15 दिन ही हुए थे, तो इतने जल्दी उसको आपने दिल की बात ब्टा देना ठीक नही था. हमे बात करते करते 1 महीना हो गया था. उससे बात करते वी एक अलग ही फीलिंग आती थी, भोथ अछा लगता था. एक दिन हम बात कररे थे,,तो मोहित ने बोला,,लेट’स मीट सम्डे!!

मैने बात काट दी,,वो थोड़ा गुस्सा सा हो गया…लेकिन फिर मन भी गया था. हाहाहा. लेकिन वो बोला,,मिल नही सकते,,वीडियो चाट तो कर सकती हो ना?? मैं मन गयी. फिर हम 1 अवर तक वीडियो चाट करते थे. मैं हमेशा ठीक 8 ब्जे रीडी रहती थी उसे देखने को. एक दिन वो ज़िद करने लगा मिलने को,,लेकिन मैं माना ही कर देती थी. हम सूभ से रात तक चाट करते रहते थे. दिन जेसे ही बदते जा रहे थे,,हम और करीब आ रहे थे.

मैं उसे हमेशा मिलने क्को माना कर देती थी तो वो गुस्सा हो जाता था और एक बार तो उसने बात करना ही बंद कर दिया. मैं भोथ रोई भोथ ज़्यादा. 2 दिन हो गये थे,,बिना उसे बात किए हुए. मैं दिन भर उसके प्रोफाइल को देखती रहती. लेकिन ना वो फोन उठता था और ना ही फोन कराता था. फिर मैं सो ही रही थी की उसका कॉल आया. मैं भोथ खुश हो गयी थी लेकिन उसकी आवाज़ सुनकर मैं रो पड़ी. उसकी याद में मुझे यह भी नही टा चला की आज मेरा बर्तडे है..ठीक 12:00 ब्ज रहे थे रात के और वो मेको धीमी धीमी आवाज़ में बर्तडे विश कर रहा था,,मेरे आंशु एक दूं से खुशी में चेंज हो गये. उसके बाद मेरे बर्तडे पे हम पहली बार मिले उसने सब कुछ बहुत अच्छे से अरांगे किया हुआ था. मुझे भोथ ही ज़्यादा स्पेशल फील हुआ उस दिन. हमने मेरा बर्तडे सेलेब्रेट किया और लास्ट्ली उसने मेको टाइट्ली हग किया और हे किस्ड मे ऑन माई फोरहेड. यह मेरी प्यार की कहानी थी और ई होप आप लोग की ज़िंदगी में भी कोई ना कोई ज़रूर होगा जो आपके ज़ाइन की वजह होगा.

और बतो ही बतो में प्यार हो गया

मेने प्यार करना नही चोदा, सिर्फ़ जताता नही हू अब

मेने प्यार करना नही चोदा, सिर्फ़ जताता नही हू अब

कहते हैं किसी चीज़ को दिल से चाहो तो वो तुम्हे मिल जाती है. मेरी कहानी की शुरुआत भी कुछ ऐसे ही हुई. मैं लंडन मे पार्ट टाइम जॉब कराता था एक दिन मेरे शॉप मे एक लड़की आई “मीयर्रा”, मुझे उस से प्यार हो गया, उसके लिए हर पल सोचता रहता था. एक दिन वो मेरे पास आई और कहा की मैं उसे अच्छी हिन्दी सीखा डून क्यूंकी उसकी मा इंडियन है. मैने उसकी क्लासस स्टार्ट की एक दिन क्लास मे थोड़ा ज़्यादा टाइम हो गया और वो आपने घर जाने लगी, घर जाते हुए मैने उसे बता दिया की मैं उस से प्यार कराता हूँ. 12 दिन बाद पता चला की वो आक्सिडेंट मे इंज्र हो गयी और मेमोरी लॉस हो गया. मैं उसे सब याद दिलाने लगा की तब तक मे एक लड़का “जॉन” जो उसका फ्रेंड था वो आया और उसको कह दिया की तुम्हारे मेमोरी लॉस के पहले मैं तुम्हारा ब्फ था.

वो उस से प्यार करने लगी और मैं वापस इंडिया आगेया ,यह सोच कर की कभी तो वो लौटेगी. मैने इंडिया मे नेवी जाय्न की.एक दिन मिशन के दौरान ही वो मुझे दिखी, उसने काले कपड़े पहने थे और गाते के पास इंतेज़ार कर रही थी. मैं गया उसने मुझसे पूछा की क्या तुम मुझे आक्सेप्ट करोगे. मैने उसे आक्सेप्ट नही किया क्यूंकी मैं उस से गुस्सा था, और ये सुन कर उसने आपनी जान दे दी. आज भी उसकी आवाज़, चेहरा, आखिएं, बाते, सब याद आता है, आज भी हमारी कहानी ख़त्म नही हुई, क्यूंकी जो कहानी ख़त्म हो जाए उसमे कहानी नही होती…

आज भी उसकी यादें समेत कर मैं लंडन मे उसी के घर मे रहता और मैने आज तक शादी नही की…बस उसकी फोटो के साथ सोता जागता और बात कराता हुन्न्ं.

जिस ज़िंदगी की तलाश तुम्हे थी
वो ज़िंदगी मिल गयी
मगर ज़िंदगी ही बदल सी गयी
याद तो तुम्हारी आती है

मेने प्यार करना नही चोदा, सिर्फ़ जताता नही हू अब